कोरोना वायरस ही नहीं ये 6 वायरस भी बन सकते हैं सेहत के लिए बड़ा खतरा, संक्रमण से बचने के लिए अपनाएं ये 5 उपाय

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चीन के वुहान से शुरू हुआ कोरोनावायरस का प्रकोप दिन-ब-दिन भयावह होता जा रहा है। चीन, हांगकांग और मकाऊ के अलावा आठ देश अब तक इस जानलेवा संक्रामक वायरस की चपेट में आ चुके हैं। गौरतलब है कि भारत में भी इसकी आहट सुमाई दे चुकी है। चीन में अब तक इस वायरस से 26 लोगों की मौत और 870 से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं।

बीजिंग सरकार ने इस वायरस से संक्रमित 23 मामले सामने आने के बाद वहां आपातकाल लगा दिया गया है। एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने कहा, दिल्ली या भारत में कहीं से भी आने वाले कोरोनावायरस के संदिग्ध मरीजों की देखभाल और इलाज के लिए एम्स में एक अलग वार्ड भी बनाया गया है।

दुनियाभर में चीन से फैला कोरोनावायरस ही डॉक्टरों के लिए परेशानी का सबब नहीं बना है। बता दें, कोरोनावायरस के अलावा 6 और अलग वायरस हैं जो दुनियाभर में लोगों के लिए दशहत का कारण बने हुए हैं। आइए जानते हैं आखिर कौन से हैं वो 6 वायरस और बचने के लिए क्या करें उपाय।

जीका वायरस- इसका प्रकोप 2015 में शुरू हुआ, अगले ही साल अमेरिका के एक दर्जन से अधिक देशों में 15 लाख मामले सामने आए। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे नियंत्रण करने की चेतावनी दी है।

सुपरबग– ये अपने अंदर वायरस रोधी क्षमता पैदा करते हैं। एंटीवायरस का प्रयोग बढ़ने से इसके महामारी बनने की संभावना बढ़ी है।

एसएआरएस– यह हाल में फैले कोरोना वायरस से ही जुड़ा संक्रमण है, जिसे ‘गंभीर तीव्र श्वसन सिंड्रोम’ (एसएआरएस) कहते हैं। इसे फैलने से रोकने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने संक्रमण श्रृंखला को तोड़ा पर इसका जड़ से उन्मूलन नहीं हुआ है इसलिए यह फिर से उभर सकता है।

वायरल रक्तस्रावी बुखार– इबोला, लासा, रिफ्ट वैली, मारबर्ग जैसे वायरस संपर्क में आने से फैलते हैं, इनके वैश्विक महामारी बनने की संभावना अधिक है।

एच5एन1– इसे एवियन इन्फ्लुएंजा भी कहते हैं जो इन्फ्लुएंजा का ही उपप्रकार है। वैज्ञानिक मानते हैं कि जिस तरह इन्फ्लुएंजा से एच5एन1 वायरस पनपा है, ऐसे ही इसका मानव इन्फ्लूएंजा वायरस से संयोजन हो गया तो यह घातक बन जाएगा।

इंफ्लुएन्जा– यह वायरस प्राकृतिक रूप से जंगली व जलीय पक्षियों से फैलता है जो एक से दूसरी प्रजातियों में संक्रमित होता है। इसके महामारी का रूप लेने की संभावना इसलिए अधिक हैं क्योंकि यह मुर्गी के जरिए इंसान के शरीर में पहुंचता है।

भारत में इनका प्रकोप-
छोटी चेचक- 1974 में देशभर में 15,000 लोगों व 1994 में सूरत में 52 लोगों की जान गई।
कालरा- दूषित जल से होने वाला यह संक्रमण 2008 में फैला और 49 मौतें हुईं।
स्वाइन फ्लू- इंफ्लूएन्जा ए वायरस से फैलने वाले स्वाइन फ्लू के कारण 2015 में 2035 मौते हुईं।
जापानी एन्सेफलाइटिस- 2017 से गोरखपुर में फैले इस संक्रमण से 64 लोगों की मौत हो चुकी हैं।
निपाह वायरस- 2018 से देश में फैले इस संक्रमण से अब तक 17 मौत दर्ज हैं।

मास्क की मांग में बंपर वृद्धि
कोरोना वायरस के कारण मास्क की मांग- इतनी अधिक बढ़ गई है कि ताइवान सरकार ने घरेलू मांग की पूर्ति करने के लिए मास्क का निर्यात अगले महीने तक रोक दिया है। वहीं मकाऊ के प्रशासन ने नियम बनाया है कि हर घर को अधिकतम दस मास्क ही बेचे जाएंगे।

संक्रमण से बचने के ये पांच उपाय

जिन्हें सर्दी या फ्लू हों उनसे करीबी संपर्क बनाने से बचें।
जंगली और खेजों में रहने वाले जानवरों के साथ असुरक्षित संपर्क न बनाएं।
खंसते या छींकते हुए अपनी नाक और मुंह को टिश्यू पेपर या मुड़ी हुई कोहनी से ढकें।
अपने हाथ को साबुन और पानी या अल्कोहल युक्त हैंड रब से साफ करें।
मांस और अंडे को अच्छी तरह पकाने के बाद ही खाएं।

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